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dhaniya ki katai

Dhania ki katai (धनिया की कटाई)

Dhania ki katai (धनिया की कटाई)

जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत एक उपजाऊ भूमि है यहां हर तरह की फसलें उगाई जाती हैं। उसमें से एक धनिया भी है धनिया जिसको इंग्लिश भाषा में coriander भी कहते हैं। धनिया के एक नहीं कई सारे फायदे हैं फायदे के साथ ये खाने को जायकेदार  भी बनाता है। धनिया में पाए जाने वाले तत्व जैसे डाइटरी फाइबर ,प्रोटीन ,विटामिन सी का मुख्य स्त्रोत होता है। साथ ही साथ इसमें विटामिन बी3 कैलशियम ,मैग्निशियम, मैग्नीज, आयरन आदि भी मौजूद होते हैं। आइये जानते है धनिये की कटाई के बारे में !

धनिया की कटाई (Coriander Harvesting) in Hindi:

धनिया की कटाई की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है जिसके द्वारा धनिया की कटाई की जाती है:
  • जब धनिया की फसल पूरी तरह से पक जाती है तो इसके सूखने के बाद इसकी खूब अच्छी तरह से तोड़ने( तुड़ाई )की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाता है।
  • तुड़ाई के बाद इसे खूब अच्छे साफ पानी से धोया जाता है। 30 से 40 दिन पूर्व बीत जाने के बाद।
  • धनिया की कटाई से पहले धनिया के बीज को स्टोर करना होता है। जब धनिया का पौधा भूरा रंग का हो जाए। तो ही उसे काट कर एक कागज की थैली में रख दिया जाता है।
  • थैली को आपको कहीं दीवार पर लटका कर रखना होता है। उसके पौधे को सूखने से बचाने के लिए।जब तक सारे बीच थैली में ना गिर जाए।

कुछ इस प्रक्रिया द्वारा किसान धनिया की कटाई करते है।

धनिया की गिनती मसाला वर्गीकरण फसलों में होती है (Coriander is Counted in Spice Classification Crops) in Hindi:

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  • धनिया की मांग पूरे साल मार्केट में बनी रहती है।
  • मार्केट में धनिया की लगातार मांग देते हुए। धनिया की बीज को अच्छी तरह से कंटेनर में स्टोर कर भी रखा जाता है।
  • पत्तियों को सुखाकर इसे स्टोर कर रखा जाता है।
  • धनिया को सुखाने के लिए कृषि इसे ऊंची जगह पर लटका कर रख देते है जिसके बाद धनिया अच्छे से सूख जाने के बाद कंटेनर में स्टोर हो सके।
  • धनिया की कई किस्में और इसकी बहुत सारी बीच काफी मात्रा में उपयुक्त हैं।

धनिया की फसल कितने दिन में तैयार होती है ( In How Many Days Coriander Crop is Ready) in Hindi:

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  • धनिया की फसल उगाने के लिए इसकी सिंचाई करनी होती है। जिसमें लगभग30 से 35 दिन का समय लगता है।
  • धनिया फसल की दूसरी सिंचाई का समय लगभग 50 से 60 दिन का होता है। साख फूटने के बाद यह सिंचाई की जाती है।
  • सिंचाई के बाद धनिया के फूल आना शुरू हो जाते हैं तथा बीच बनने की अवस्था शुरू हो जाती है
  • यह सभी सिंचाई करने के बाद धनिया की एक अच्छी फसल तैयार हो जाती है। 90 से 100 दिन के उपरांत आपको धनिया की अच्छी फसल की प्राप्ति होती है।

धनिया की खेती का समय ( Coriander Cultivation Time) in Hindi:

dhaniya ki kheti
  • धनिया की खेती का सही समय रबी का मौसम है।यह रबी के मौसम में बोई जाने वाली फसल है।
  • धनिया फसल की जोताई का समय 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच का होता है जब इस फसल को बोया जाता है।
  • धनिया की अच्छी हरी पत्तियों को प्राप्त करने के लिए आपको दिसंबर तक का इंतजार करना होता है।
  • धनिया को उगाने के लिए डाली जाने वाली खाद्य कृषि विशेषज्ञों के अनुसार चुनी जाती है।
  • विशेषज्ञों द्वारा खेत को तैयार करने के लिए गोबर की खाद मिट्टी में सही तरह से मिलाना होता है।
  • जिसकी मात्रा 100 से 150 कुंटल होनी चाहिए। इसकी खेती के लिए नत्रजन 80 किलोग्राम होना आवश्यक है।
  • इसमें करीब 50 किलो पोटाश तथा फास्फोरस की आवश्यकता पड़ती है।
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धनिया की फसल में सल्फर कब डालते हैं( When to Add Sulfur in Coriander Crop) in Hindi:

Coriander Crop धनिया की फसल के लिए सल्फर बहुत ही उपयोगी होते हैं। इसको किस प्रकार इस्तेमाल करना है? इसकी कितनी मात्रा में आपको सिंचाई करनी होती है? यह सभी सवालों के जवाब कुछ निम्न प्रकार है:
  • एक 1000 लीटर पानी में आपको सिर्फ 1 लीटर सल्फर मिलाकर शाम के समय फसलों पर छिड़काव करना होता है।
  • शाम के समय आपको हल्की सिंचाई करने के दौरान मेंढ के हर तरफ धुआं करना होता है।
  • यदि आपको पाला पड़ने की आशंका दिखाई दे तो आप सबसे पहले डाई मिथाइल सल्फो ऑक्साईड को 75 ग्राम की मात्रा में 1000 लीटर पानी में अच्छे से मिलाकर पूरी तरफ छिड़काव कर दें।

धनिया के फायदे (Benefits of Coriander) in Hindi

dhaniya ke fayade  धनिया एक नहीं बल्कि कई तरह से आपके लिए उपयोगी साबित है।धनिया की उपयोगिता कुछ इस प्रकार है :
  • डायबिटीज से आजकल हर व्यक्ति परेशान है। डायबिटीज से होने वाले नुकसान हमारे शरीर को कमजोर बना रहे हैं। धनिया आपके डायबिटीज को कंट्रोल करता है।
  • धनिया रामबाण है, जो आपके ब्लड शुगर को लेवल में बना कर रखता है।
  • किडनी के रोग को रोग मुक्त करने के लिए भी यह बहुत ही असरदार साबित हुआ है।
  • यदि आप बार-बार अपनी पाचन क्रिया से परेशान हैं। तो आप रोजाना धनिया का सेवन करें यह आपकी पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है।
  • कोलेस्ट्रोल को कंट्रोल में रखता है।
  • आंखों की सुरक्षा तथा आंखों की रोशनी को बढ़ाने का भी कार्य करता है।
  • फसल की कटाई की शुरुआत उसका कद 20 से 25 होने के बाद करनी चाहिए। हरी पत्तियों को काटकर अलग कर दें।
  • आपको यह कटाई तीन से चार बार करनी होती है। पूरी कटाई हो जाने के बाद आपको 6 से 7 दिनों तक धूप में फसल को सूखने देना है।
  • धनिया की पत्तियों को चबाने से मुंह सुगंधित रहता है तथा इसको चबाने से हमारे दांतों और मसूड़ों को कई तरह के फायदे पहुंचते हैं।
  • धनिया में मौजूद मिनरल इसको और भी ज्यादा उपयोगी बनाता है।धनिया अपने बेमिसाल फायदे के लिए जानी जाती हैं।
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निष्कर्ष (Conclusion)

Dhaniya crop Conclusion हमारी इस पोस्ट द्वारा आपने धनिया की कटाई और धनिया से जुड़ी सभी आवश्यक बातों को जान लिया होगा, तो हम आपसे यह उम्मीद करते हैं।कि आप हमारी इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और आगे आपके जो भी सवाल हो। जानने के लिए संपर्क करें, हम उम्मीद करते हैं यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आई होगी।
सुगंधित धनियां लाए खुशहाली

सुगंधित धनियां लाए खुशहाली

धनियां मसालों और आमतौर पर हर घर में उपयोग में लाया जाता है। इसके पत्तों की महक किसी भी सब्जी के जायके में चार चांद लगाने का काम करती है। इसमें अनेक ओषधीय गुण भी हैं। इसके चलते इसकी खेती बेहद लाभकारी है। इसकी खेती देश के आधे से हिस्से में कम कहीं ज्यादा होती है। इसकी खेती के लिए भी बलुई दोमट मिट्टी अच्छी रहती है। बेहतर जल निकासी वाली जमीन में धनियां लगाया जाना उचित होता है। धनियां को कतर कर बेचना एवं जड़ सहित बेचने की प्रक्रिया मंडियों के अनुरूप अपनाएं। 

धनियां की किस्में

 

 वर्तमान दौर में किसी भी खेती के लिए उस इलाके के चिए संस्तुत किस्मों का चयन बेहद जरूरी है। राजस्थान के कोटा अदि में धनियां की अच्छी खेती होती है। वहां की किस्में भी कई गर्म इलाकों में बेहद अच्छी सुगंध और उत्पादन दानों दे रही हैं। इसके अलावा गुजरात धनियां 1 व 2, पंत धनियां 1, मोरोक्कन, सिमपो एस 33, ग्वालियर 5365, जवाहर 1, सीएस 6, आरसीआर 4, सिंधु, हरीतिमा, यूडी 20 साहित अनेक किस्में बाजार में मौजूद हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि वह किसी भी नई खेती को करने से पूर्व अपने जनपद के कृषि या उद्यान अधिकारी या कृषि विज्ञान केन्द्रों के विशेषज्ञों से संपर्क करें ताकि उन्हें उचित जानकारी प्राप्त हो सके।

धनियां की खेती के लिए जमीन की सिंचाई कर तैयार करें। इससे पूर्व सड़ी हुई गोबर की खाद खेत में जरूर डालें। धनियां की बिजाीई हेतु 5-5 मीटर की क्यारियां बना लें, जिससे पानी देने में और निराई-गुड़ाई का काम करने में आसानी रहे। 

बुवाई का समय

 

 धनिया की फसल के लिए अक्टुंबर से नवंबर तक बुवाई का उचित समय रहता है। बुवाई के समय अधिक तापमान रहने पर अंकुरण कम हो सकता है। बुवाई का निर्णय तापमान देख कर करें। क्षेत्रों में पला अधिक पड़ता है वहां धनिया की बुवाई ऐसे समय में न करें, जिस समय फसल को अधिक नुकसान हो।

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बीजदर व बीजोपचार

 

 धनियां का 15 से 20 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। बीजोपचार के लिए दो ग्राम कार्बेंडाजिम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। बुवाई से पहले दाने को दो भागों में तोड़ देना चाहिए। ऐसा करते समय ध्यान दे अंकुरण भाग नष्ट न होने पाए और अच्छे अंकुरण के लिए बीज को 12 से 24 घंटे पानी में भिगो कर हल्का सूखने पर बीज उपचार करके बोएं। सिंचित फसल में बीजों को 1.5 से 2 सेमी. गहराई पर बोना चाहिए, क्योंकि ज्यादा गहरा बोने से सिंचाई करने पर बीज पर मोटी परत जम जाती हैं, जिससे बीजों का अंकुरण ठीक से नहीं हो पाता हैं।

खरपतवार नियंत्रण

धनिये में शुरूआती बढ़वार धीमी गति से होती हैं इसलिए निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों को निकलना चाहिए। सामान्यतः धनिये में दो निराई-गुड़ाई पर्याप्त होती है। पहली निराई-गुड़ाई के 30-35 दिन पर व दूसरी 60 दिन पर अवश्य करेंं। खरपतवार नियंत्रण के लिए पेन्डीमिथालीन 1 लीटर प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में मिलाकर अंकुरण से पहले छिड़काव करें। ध्यान रखें कि छिड़काव के समय भूमि में पर्याप्त नमी होनी चाहिए और छिड़काव शाम के समय करें।